चौथी वाणी:
"हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?"
(मत्ती 27:46)
1. यीशु ने हमारी जगह दर्द सहा
मतलब (Meaning) — यीशु ने हमारी जगह आत्मिक दर्द सहा
✦
यह वाणी तब बोली
गई जब संसार के सारे पाप यीशु पर आ गए थे।
✦ यीशु
परमेश्वर का पुत्र था, पर
उस क्षण में उसने परमेश्वर से अलग होने की भावना महसूस की।
✦ यह शारीरिक
नहीं, आत्मिक
दर्द था — परमेश्वर से अलग हो जाना।
➡️
यह वह घड़ी थी
जब यीशु ने हमारी आत्मिक दूरी अपने ऊपर ले ली।
🔹
यीशु ने वो दर्द
झेला जो हमें पाप के कारण सहना चाहिए था – आत्मिक रूप से परमेश्वर से अलग होना था।
🔹
सिख:
यीशु ने हमें बचाने
के लिए परमेश्वर से अलग होने का एहसास सहा।
आध्यात्मिक शिक्षा:
पाप हमें परमेश्वर से अलग करता है,
लेकिन
यीशु ने वो दूरी खुद झेली।
✦
उसने न केवल
हमारे पापों को उठाया, बल्कि
उस पाप का परिणाम — “परमेश्वर से अलगाव” भी खुद पर लिया।
✦ आज
जब हम उसके बलिदान पर विश्वास करते हैं, हमें वह दूरी नहीं सहनी पड़ती है।
उदाहरण:
एक बच्चा गलती करता है और माँ उसे कुछ
समय बात नहीं करती। बच्चा रोते हुए कहता है:
"माँ,
तू
मुझसे बात क्यों नहीं कर रही?"
➡️
वह अलगाव उसे
तोड़ देता है – वैसे ही यीशु को भी परमेश्वर से अलगाव महसूस हुआ।
उदाहरण:
एक दोस्त किसी से धोखा खाता है,
फिर वह कहता है:
"तूने
मुझे क्यों छोड़ा?"
➡️
दर्द तब ज्यादा
होता है जब अपना कोई छोड़ दे। यीशु ने वही अकेलापन महसूस किया।
उदाहरण (बाइबिल से):
भजन संहिता 22:1 — "हे मेरे परमेश्वर तू ने मुझे क्यों
छोड़ दिया?"
➡️
यह भविष्यवाणी
यीशु की इस वाणी में पूरी होती है। वह जानता था कि उसका दर्द अस्थायी है, लेकिन आवश्यक है।
लागूकरण (Application):
- क्या आपने कभी पाप की वजह से परमेश्वर से
दूरी महसूस की है?
➡️ यीशु ने वह दूरी खुद सह ली — अब हम उस यीशु के पास लौट सकते हैं। - क्या आप अकेलेपन से जूझ रहे हैं?
➡️ यीशु जानता है वह दर्द — वो कहता है, "मैं तुझे कभी न छोड़ूँगा।" (इब्रानियों 13:5) - क्या आप चाहते हैं कि परमेश्वर आपके पास
रहे?
➡️ तो अपने पाप स्वीकार करें, और यीशु में विश्वास करें की वह आपको कभी अकेला नहीं छोड़ेगा।
- इस वाणी में सबसे गहरी बात ये है कि —
"यीशु को छोड़ा गया ताकि हमें कभी छोड़ा न जाए।"
✅ 2. यह वाणी
पवित्रशास्त्र की पूर्ति है
मतलब (Meaning):
यीशु ने यह वाक्य भजन संहिता 22:1 से बोला। यह
वाणी केवल दर्द की नहीं, बल्कि यह दर्शाती है कि वह वचन जो
सदियों पहले लिखा गया, अब पूरा हो रहा है।
✦ भजन संहिता 22
में
मसीह के क्रूस की घटनाओं का वर्णन है — हाथ-पैर छेदे गए, वस्त्र बांटे गए,
उपहास
किया गया।
➡️ यीशु ने दिखाया
कि वह वही है, जिसकी भविष्यवाणी की गई थी।
आध्यात्मिक
शिक्षा (Spiritual Teaching):
बाइबल का हर वचन सच्चा है और पूरा होता है।
✦ परमेश्वर का वचन
केवल कहानी नहीं है — वह जीवित, भविष्यवाणी करने वाला और पूरा होने
वाला वचन है।
✦ जब यीशु ने यह वाणी बोली, वह दिखा रहा था कि वह मसीह है, जिसकी
प्रतीक्षा की जा रही थी।
✅ उदाहरण:
भजन संहिता 22:7 — “वे मेरे ऊपर हँसते हैं, मुँह
चिढ़ाते हैं”
✦ यीशु के साथ ऐसा ही हुआ – लोग कहते थे, “अगर तू मसीह है
तो खुद को बचा।”
✅ उदाहरण:
भजन 22:16 — “उन्होंने मेरे हाथ और पैर छेदे”
✦ क्रूस पर कीलों से ठोकना – बिल्कुल वैसा ही हुआ।
✅ उदाहरण:
भजन 22:18 — “मेरे वस्त्र आपस में बाँटते हैं”
✦ सैनिकों ने यीशु के कपड़े बाँटे और चिट्ठियाँ डालीं (यूहन्ना 19:24)
✅ लागूकरण (Application):
- क्या
मैं बाइबल के वचनों पर पूरा विश्वास करता हूँ?
➡️ यीशु ने दिखाया कि हर वचन पूरा होता है – हमे यीशु के वचन पर भरोसा करना ही है। - जब हम उलझन में होते हैं, क्या
हम वचन की ओर देखते हैं?
➡️ क्योकि वचन ही हमारे जीवन की दिशा है। - क्या
हम यीशु को केवल इतिहास का पात्र मानते हैं या वचन की पूर्ति?
➡️ हमें यीशु को अपने उद्धारकर्ता और मसीह के रूप में मानना चाहिए।
3. परमेश्वर की पवित्रता और न्याय प्रकट
हुआ
मतलब (Meaning):
यीशु पापरहित था, फिर भी उसने हमारे पाप अपने ऊपर ले
लिए।
उस
क्षण परमेश्वर ने अपनी पवित्रता और न्याय को दिखाया — पाप से समझौता नही किया।
✦ इसीलिए परमेश्वर
ने उस क्षण अपने पुत्र से मुँह मोड़ लिया।
➡️ पाप के साथ
परमेश्वर का मेल नहीं हो सकता — इसीलिए हम देख सकते है की न्याय का मूल्य देना
पड़ा।
आध्यात्मिक
शिक्षा (Spiritual Teaching):
परमेश्वर प्रेम है, पर वह न्यायी और पवित्र भी है।
✦ वह पाप से नफरत
करता है, लेकिन पापी से प्रेम करता है।
✦ इसलिए उसने यीशु को हमारे पापों के लिए दंडित किया।
✅ उदाहरण:
बाइबल में लिखा है: "पाप की मजदूरी मृत्यु है" (रोमियों 6:23)
✦ यीशु ने उस मजदूरी को खुद पर लिया। वो हमारे पापों के लिए मर गया।
✅ उदाहरण:
एक जज जो अपने बेटे को दंड देता है क्योंकि उसने कानून तोड़ा —
✦ जज न्यायी है, फिर चाहे दोषी उसका बेटा ही क्यों न
हो।
✅ उदाहरण:
पुराने नियम में भी, जब कोई पाप करता था तो बलिदान देना
होता था।
✦ यीशु वह अंतिम बलिदान बना है
जो सब पापों के लिए दिया गया।
✅ लागूकरण (Application):
- क्या मैं पाप को हल्के में लेता
हूँ?
➡️ परमेश्वर कभी पाप को नजर अंदाज नहीं करता – हमें भी गंभीर रहना चाहिए। - क्या
मैं पवित्रता के लिए प्रयास करता हूँ?
➡️ जिसने हमें बचाया है, उसके लिए हम पवित्रता से जिएँ।
निष्कर्ष:
- यीशु
को अकेला छोड़ा गया क्योंकि परमेश्वर पाप से समझौता नहीं करता।
- पर
यह इसलिए हुआ ताकि हम कभी छोड़े न जाएँ।
- उसका
दर्द हमारी छुटकारे की कीमत है।
- पाप
परमेश्वर से हमें अलग करता है, पर
यीशु हमे परमेश्वर से जोड़ता है।

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