Title: आझाद है हम
Chorus
आझाद है हम, आझाद है हम
यीशु मसीह में आझाद है हम
आझाद है हम, आझाद है हम
यीशु के लहू में आझाद है हम
Verse 1
आझादी:
यीशु ने हमको मुक्ति दी है
पापों के बंधन तोड़े है
उसके प्रेम ने राह दिखाई
आझाद हम हो गए है
Verse 2
क्योंकि:
यीशुने हमको अपनाया है
सत्य और प्रेम सिखाया है
उसके बलिदान से पाई हमने
सच्ची आझादी
Verse 3
विश्वास:
यीशु पर हमने विश्वास किया है
जीवन का नया मार्ग पाया है
उसके प्रेम से हर बंधन टूटे है
आझाद हम हो गए है
Verse 4
अंतिम:
हर दिन यीशु की स्तुति करेंगे
उसके नाम को ऊँचा करेंगे
हर दिन प्रभु का धन्यवाद करेंगे
आशा और प्रेम में बढ़ते रहेंगे
शीर्षक: आझाद है हम
कोरस:
कोरस में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि हम यीशु मसीह में आझाद हैं। यह आझादी उस लहू की वजह से है जो यीशु ने हमारे लिए बहाया। ये पंक्तियाँ हमें इस सच्चाई की याद दिलाती हैं कि यीशु के बलिदान ने हमें हर प्रकार के बंधन से मुक्ति दिलाई है।
पहला अंतरा (आझादी):
पहले अंतरे में, इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि यीशु ने हमें मुक्ति दी है। वह हमारे पापों के बंधन को तोड़कर हमें एक नई राह दिखाई है। उसके प्रेम और बलिदान के कारण हम आझाद हो गए हैं।
दूसरा अंतरा (क्योंकि):
दूसरे अंतरे में यह बताया गया है कि यीशु ने हमें अपनाया और हमें सत्य और प्रेम का मार्ग दिखाया। उसके बलिदान से हमने सच्ची आझादी पाई है, जो हमें हर बंधन से मुक्त करती है।
तीसरा अंतरा (विश्वास):
तीसरे अंतरे में, विश्वास पर ज़ोर दिया गया है। हमने यीशु पर विश्वास किया और अपने जीवन का एक नया मार्ग पाया। उसके प्रेम से हमारे सभी बंधन टूट गए हैं, और हम पूरी तरह से आझाद हो गए हैं।
चौथा अंतरा (अंतिम):
अंतिम अंतरे में, यह कहा गया है कि हम हर दिन यीशु की स्तुति करेंगे और उसके नाम को ऊँचा करेंगे। हम प्रभु का धन्यवाद करते रहेंगे और आशा और प्रेम में निरंतर बढ़ते रहेंगे। यह अंतरा हमें प्रेरित करता है कि हम अपने विश्वास को और मजबूत करें और यीशु की आझादी में जीते रहें।