*जय मसीह की दोस्तों*
*सोमवार*
📖 *वचन: मत्ती रचित सुसमाचार 21:12-13*
*Point 1: जब यीशु आते हैं… तो सच्चाई सामने आती है।*
यीशु मसीह मन्दिर में गए और जो लोग सालों से छुपा रहे थे, वह सब खुल गया।
बाहर से सब ठीक लग रहा था। लेकिन अंदर व्यापार, लालच और दिखावा भरा हुआ था।
*संदेश:*
*जब यीशु हमारे जीवन में आते है तो वह हमारे अंदर की असली हालत दिखा देते हैं।*
Connection:
जब सच्चाई सामने आती है… तो अगला कदम क्या होता है?
*Point 2: जब सच्चाई दिखती है… तो यीशु चुप नहीं रहते।*
यीशु ने सिर्फ देखा नही लेकिन उसने action लिया और मेज़ें उलट दी।
इसका मतलब: परमेश्वर पाप को ignore नहीं करता।
*संदेश:*
*हम सोचते हैं, “चलता है।” लेकिन परमेश्वर कहता है, “यह नहीं चलेगा।”*
Connection:
लेकिन सवाल है, यीशु इतना strong क्यों हुए?
*Point 3: क्योंकि परमेश्वर का घर पवित्र होना चाहिए।*
यीशु ने कहा: “मेरा घर प्रार्थना का घर कहलाएगा।”
मन्दिर सिर्फ building नहीं था लेकिन वह परमेश्वर की उपस्थिति की जगह थी।
*संदेश:*
*जहाँ परमेश्वर रहता है, वहाँ पवित्रता जरूरी है।*
Connection:
अब सबसे important सवाल… आज वह घर कहाँ है?
*Point 4: आज परमेश्वर का घर हमारा दिल है।*
आज पत्थर का मन्दिर नही लेकिन हमारा दिल ही मन्दिर है।
लेकिन सच्चाई सुनो: बाहर हम worship करते हैं और अंदर हम struggle करते है।
गुस्सा, jealousy, गलत आदतें, छुपे हुए पाप
*“बाहर होशन्ना… अंदर गंदगी”*
Connection:
अगर दिल मन्दिर है… तो अगला कदम क्या होना चाहिए?
*Point 5: जब दिल मन्दिर है… तो सफाई जरूरी है।*
जिस तरह यीशु ने मन्दिर को साफ किया। वह आज भी हमारे दिल को साफ करना चाहते है।
वह सिर्फ देखने नहीं आते लेकिन वह बदलने आते हैं।
*संदेश:*
*जब यीशु हमारे जीवन में आते है तब वह उपस्थिती के साथ शुद्धता भी लाते है।*
Connection:
लेकिन यह सफाई अपने आप नहीं होगी…
*Point 6: यह सफाई तभी होगी… जब हम अनुमति देंगे।*
उस दिन यीशु ने खुद सफाई की। लेकिन आज… हमें अपने दिल का दरवाज़ा खोलना होगा।
हमें खुद प्रभु को कहना होगा: “प्रभु, जो गलत है उसे निकाल दे।”
समर्पण (surrender) के बिना बदलाव (transformation) नहीं होता। इसीलिए आज उसको अनुमति दीजिए। ताकि वो वह आपको शुद्ध कर सके।
“आज यीशु आपके दिल के बाहर खड़े नहीं है, वो आपके अंदर आना चाहते हैं…”
“लेकिन याद रखो, जब वो अंदर आएंगे, तो सफाई जरूर होगी।”
इसलिए आज फैसला करो: “प्रभु, मेरा दिल सिर्फ तेरा घर बने, प्रार्थना का घर, पवित्र घर।”
*आमेन।*
*धन्यवाद पढ़ने के लिए प्रभु आपको आशीष दे।*


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